सामाजिक संवादः व्यक्तित्व विकास की कुंजी
-यशवर्धन दीक्षित
संवाद हमारे जीवन के लिए इतना जरूरी है जितना एक प्यासे को पानी की। बदलते जमाने की वजह से और आधुनिकता के आ जाने की वजह से आज सामाजिक संवाद में कमी देखने को मिल रही है, जिसकी वजह आधुनिक टेक्नोलॉजी, जैसे मोबाइल, टैबलेट और सोशल मीडिया एप्स आदि।
आज संवाद आमने-सामने न होने की वजह से हमारे व्यक्तित्व के निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। क्योकि लोग टेक्नोलॉजी के माध्यम से संवाद करने लगे हैं। किसी को जब कोई जानकारी लेनी होती ह तो वह तुरंत उपलब्ध होने वाली टेक्नोलॉजी अर्थात आम भाषा में मोबाइल का प्रयोग करता है।
वर्तमान में अधिकांश लोग अपने प्रश्नों को सामाजिक स्तर की विचार-विमर्श की बैठक या गोष्ठी पर अपने प्रश्नों को रखने की बजाय मोबाइल से गूगल पर संवाद करके अपने प्रश्नों का उत्तर जान लेते हैं यह बात सोचने वाली है कि आज ज्ञान को पाने के लिए हमने अपने आप को एक मशीन के सहारे कर रखा है।
टेक्नोलॉजी का विकास तो इसलिए किया गया था ताकि वह हमारे जीवन के श्रम और समय को आसान बना सके परंतु आज का मानव समाज मशीनों पर निर्भर रहना ही अपने जीवन का आधार मानने लगा। धीरे-धेरे सामाजिक संवाद में रुकावट देखने को मिलती है जबिक मानव संवाद करने से हमारा ही नहीं बल्कि दूसरे का भी मानसिक विकास होता है। यह सच है कि मशीनों के जरिए हमे अपने सवालों के जवाब सीधे तौर पर मिल जाते हैं परंतु उन सवालों का गहराई से अध्ययन करना है तो हमें सदैव सामाजिक संवाद को बढ़ावा देना होगा। यह सामाजिक संवाद हमारे समाजिक व्यवहार को जोड़कर रखता है और हमको सही दिशा मे कार्य करने व समझाने में मदद करता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार का ही अंग समझना चाहिए। इसलिस वर्तमान की पीढ़ी को भी अपने परिवार के माता-पिता, भाई-बहन, चाचा-ताऊ, बुआ-फूफा, शिक्षक, मित्र आदि से सदैव आमने-सामने का संवाद समय निकालकर करना ही हमारे लिए अच्छा रहेगा ताकि सुख-दुख मे हम सब साथी बने।
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